Non Proliferation Treaty 2020(परमाणु अप्रसार संधि) NPT History, Interesting Facts Exam Point of View

Non Proliferation Treaty (परमाणु अप्रसार संधि)

परमाणु अप्रसार संधि (Non Proliferation Treaty)

परमाणु अप्रसार संधि (Non Proliferation Treaty) को एनपीटी के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य विश्व भर में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु परीक्षण पर अंकुश लगाना है। 1 जुलाई 1968 से इस समझौते पर हस्ताक्षर होना शुरू हुआ। एनपीटी मार्च 1970 में प्रभाव में आई। अभी इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके देशों की संख्या 191 है। जिसमें पांच के पास आण्विक हथियार हैं। ये देश हैं- अमेरिकाब्रिटेनफ्रांसरूस और चीन

आरंभ में एनपीटी को केवल 25 वर्षों के लिये लागू किया गया था। अतः अप्रैल-मई 1995 में, अर्थात् 25 वर्ष की समाप्ति के बाद, न्यूयार्क में एनपीटी समीक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य एनपीटी के कार्यों की समीक्षा तथा इसके भविष्य का निर्धारण करना था। इस सम्मेलन में संधि की अनिश्चितकाल तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। संधि के विस्तार प्रस्ताव की ध्वनि मत से पारित किया गया।

इस संधि की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नांकित हैं-

 यह संधि परमाणु हथियारों के क्षैतिज (horizontal) प्रसार पर रोक लगाती है। इस के अनुच्छेद 1 और 2 के अंतर्गत परमाणु शक्ति संपन्न देश गैर-परमाणु शक्ति वाले देशों को परमाणु अस्त्र प्राप्त करने में सहायता नहीं दे सकते हैं तथा गैर-परमाणु शक्ति संपन्न देश परमाणु अस्त्र प्राप्त नहीं कर सकते हैं।

 परमाणु शक्ति सुविधाओं के संबंध में यह संधि तकनीक हस्तांतरण को जारी रखने की अनुमति देती है। आईएईए के तत्वावधान में शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये परमाणु तकनीक के विस्तार के लिये एक सुरक्षा प्रणाली विकसित की गई है। आईएईए को सभी गैर-परमाणु देशों के नागरिक परमाणु कार्यक्रमों में पूर्ण और स्वतंत्र प्रवेश की सुविधा प्राप्त है। यह इन देशों के परमाणु संयंत्रों और सुविधाओं का समय-समय पर निरीक्षण कर सकती है।

 इस संधि का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य परमाणु अस्त्रों के ऊर्ध्वगामी (vertical) प्रसार की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। यह हस्ताक्षरकर्ता देशों को परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक लगाने के लिये स्वस्थ्य वातावरण में वार्ताएं आयोजित करने का आदेश देती है। अनुच्छेद 7 परमाणु रहित क्षेत्रों (nuclear freezones) के गठन पर जोर देता है, जबकि अनुच्छेद 8 सदस्य देशों के बीच प्रत्येक पांच वर्ष के अंतराल पर बैठक आयोजित करने का आदेश देता है।

परमाणु अप्रसार संधि (Non Proliferation Treaty) का उद्देश्य

Non Proliferation Treaty या NPT का उद्देश्य विश्व में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है. यह परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है. 

परमाणु अप्रसार संधि (Non Proliferation Treaty) रोचक तथ्य

  • Non Proliferation Treaty का प्रस्ताव आयरलैंड ने रखा था और सबसे पहले हस्ताक्षर करने वाला राष्ट्र है फिनलैंड
  • इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके देशों की संख्या 191 है।
  • सिर्फ पांच संप्रभुता संपन्न देश इसके सदस्य नहीं हैं। ये हैं- भारतइजरायलपाकिस्तान द.सुदान और उत्तरी कोरिया। 
  • एनपीटी के तहत भारत को परमाणु संपन्न देश की मान्यता नहीं दी गई है। जो इसके दोहरे मापदंड को प्रदर्शित करती है।
  • इस संधि के तहत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र उसे ही माना गया है जिसने 1 जनवरी 1969 से पहले परमाणु हथियारों का निर्माण और परीक्षण कर लिया हो। इस आधार पर ही भारत को यह दर्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं प्राप्त है। क्योंकि भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में किया था।
  • उत्तरी कोरिया ने इस सन्धि पर हस्ताक्षर किये, इसका उलंघन किया और फिर इससे बाहर आ गया।
  • दक्षिण अफ्रीका ने 1980 के दशक में गुप्त रूप से हथियार बनाए लेकिन 1991 में उसने उन्हें नष्ट कर दिया और वह एनपीटी का सदस्य बन गया.
  • चीन और फ़्रांस ने इस संधि पर 1992 तक हस्ताक्षर नहीं किए.

परमाणु अप्रसार संधि संरचना

एनपीटी(Non Proliferation Treaty) में एक प्रस्तावना और ग्यारह लेख होते हैं। यद्यपि एनपीटी में “खंभे” की अवधारणा कहीं भी व्यक्त नहीं की गई है, फिर भी संधि को कभी-कभी तीन-स्तंभ प्रणाली के रूप में व्याख्या की जाती है,  उनके बीच एक निहित संतुलन के साथ:

  1. अप्रसार
  2. निरस्त्रीकरण
  3. परमाणु तकनीक का शांतिपूर्वक उपयोग करने का अधिकार

परमाणु अप्रसार संधि इतिहास (Non Proliferation Treaty History)

प्रारंभिक प्रयास, जो 1946 में शुरू हुआ, एक अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली बनाने के लिए जो सभी राज्यों को उचित सुरक्षा उपायों के तहत परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच के लिए सक्षम बनाता है, 1949 में इस उद्देश्य की उपलब्धि के बिना प्रमुख शक्तियों के बीच गंभीर राजनीतिक मतभेदों के कारण समाप्त कर दिया गया था। तब तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ दोनों ने परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था, और अपने भंडार का निर्माण करने लगे थे।

संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर, परमाणु अप्रसार के सिद्धांत को 1957 की शुरुआत में वार्ता में संबोधित किया गया था।

NPT(Non Proliferation Treaty) प्रक्रिया को फ्रैंक ऐकेन, आयरिश विदेश मंत्री द्वारा 1958 में शुरू किया गया था। NPT ने 1960 के दशक की शुरुआत में महत्वपूर्ण गति प्राप्त की।

1960 के दशक के मध्य तक अंतर्राष्ट्रीय व्यवहार के एक मानक के रूप में परमाणु अप्रसार को बरकरार रखने के लिए एक संधि की संरचना स्पष्ट हो गई थी।

1968 तक एक संधि पर अंतिम समझौता हुआ, जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोक देगा, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए सहयोग को सक्षम करेगा, और आगे परमाणु निरस्त्रीकरण का लक्ष्य प्राप्त करेगा।

इसे 1968 में हस्ताक्षर के लिए खोला गया था, जिसमें फिनलैंड हस्ताक्षर करने वाला पहला राज्य था। शीत युद्ध की समाप्ति और दक्षिण अफ्रीकी रंगभेद के बाद तकरीबन सार्वभौमिक बन गया।

1992 में, द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और फ्रांस ने एनपीटी को मान्यता दी, ऐसा करने के लिए संधि द्वारा मान्यता प्राप्त पाँच परमाणु शक्तियों में से अंतिम।

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